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  • चेक बुक समाप्त करने की योजना नहीं-केंद्र सरकार
    PUBLISHED : Nov 24 , 8:39 AM


  • सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया चेक बुक सुविधा को वापस लेने को कोई प्रस्ताव नहीं है और वह इस तरह के किसी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही। वित्त मंत्रालय ने मीडिया में इस आशय की आई खबरों का खंडन करते हुए गुरुवार को कहा कि इस तरह का कोई प्रस्ताव नहीं है। मीडिया में आई खबरों में कहा गया था कि केन्द्र सरकार देश में डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से निकट भविष्य में बैंकों खाताधारकों को दी जाने वाली चेक बुक सुविधा को समाप्त कर सकती है।

    वित्त मंत्रालय की तरफ से ट्वीट में कहा गया, ‘भारत सरकार यह पुष्टि करती है कि बैंकों की तरफ से चेकबुक सुविधा वापस लेने का उसके पास कोई प्रस्ताव नहीं है।’ नोटबंदी के बाद सरकार लैस कैश सोसाइटी के लिए डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है।

    मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार देश को लैस कैश अर्थव्यवस्था में बदलने और डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है। लेकिन चेक भुगतान परिदृश्य का अभिन्न हिस्सा है। इसमें कहा गया कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट के रूप में चेक व्यापार और वाणिज्य की रीढ़ की हड्डी है।

  • सुधार के संकेतः जीएसटी के 18-12% वाले स्लैब का हो सकता है विलय, 28% से बाहर होंगी कई वस्तुएं
    PUBLISHED : Nov 22 , 8:08 AM


  • केंद्र सरकार जीएसटी को लेकर उपभोक्ताओं को और राहत देने की तैयारी कर रही है। उसकी मंशा जीएसटी के 18 और 12 फीसदी स्लैब को विलय करने की है। इसके अलावा 28 फीसदी वाले स्लैब में से भी कई वस्तुओं को बाहर किए जाने पर विचार चल रहा है।

    केंद्र सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन ने इन सुधारों के संकेत दिए हैं। हालांकि ये बदलाव कब किए जाएंगे इसके बारे में उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी है। वहीं, जीएसटी परिषद में मंत्रियों की समिति के अध्यक्ष और बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने भी कर सुधारों की बात स्वीकार की। कहा, अभी सबसे जरूरी जीएसटी से जुड़े सभी पहलुओं को सही और समुचित तरीके से लागू कराना है। इस दिशा में हर उस पहलू पर कदम उठाया जा रहा है, जो सुधार से जुड़ा हुआ है। फिलहाल केंद्र ने बजट की तैयारी शुरू कर दी है और राज्यों को भी इस दिशा में काम करना है।

    सीमेंट पर जीएसटी घटाएंगे
    अरविंद सुब्रमणियन के मुताबिक, भविष्य में सीमेंट और अन्य जरूरी वस्तुओं को सबसे ऊंची कर दर (28 फीसदी) से बाहर कर दिया जाएगा। सरकारी खजाने की सेहत ठीक करने के लिए अभी इसे 28 फीसदी की दर में रखा गया है।

    रियल एस्टेट दायरे में आएगा
    सुब्रमणियन ने कहा, जीएसटी परिषद की पिछली बैठक के एजेंडे में भूमि और रियल एस्टेट भी शामिल थे, लेकिन इन पर बात नहीं हो सकी थी। उम्मीद है कि भूमि, रियल एस्टेट और प्राकृतिक गैस को भी जल्द ही जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है।

    अहितकर उत्पादों पर ही उच्च कर
    सरकार की मंशा सिर्फ अहितकर उत्पादों पर ही जीएसटी की उच्च दर (28 फीसदी) लागू करने की है। तम्बाकू-गुटखा जैसे अहितकर उत्पादों पर जीएसटी की पूर्व उच्च दरें लागू रहेंगी। फिलहाल इस स्लैब में एसी-फ्रिज जैसे लग्जरी उत्पाद भी शामिल हैं।

    सुधारों के संकेत
    जीएसटी परिषद में मंत्रियों की समिति के अध्यक्ष सुशील कुमार मोदी ने कहा कि मार्च के बाद राजस्व के आकलन और राज्यों के मुआ‌वजे का मुद्दा देखा जाएगा। तब तक जीएसटी लागू हुए नौ माह हो जाएंगे जिससे सुधारों की समीक्षा व अन्य सुधारवादी कदम उठाए जा सकते हैं।

  • खुशखबरी: पिछले साल के मुकाबले कन्फर्म ट्रेन टिकट मिलने की संभावना बढ़ी
    PUBLISHED : Nov 19 , 9:35 AM


  • नई दिल्ली: त्योहारों के दौरान कन्फर्म ट्रेन टिकट मिलना मुश्किल होता है लेकिन रेलवे द्वारा इस बार दिवाली के दौरान विशेष तथा नई ट्रेनों को चलाने जैसे प्रबंध के कारण प्रतीक्षा सूची के टिकट ‘कन्फर्म’ होने की दर पिछले वर्ष के मुकाबले बढ़ी है. यह बात परामर्श सेवा कंपनी "रेलयात्री" के अध्ययन में सामने आई है. ऐप के जरिये रेल संबंधी तथा अन्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाली Railyatri.in के अध्ययन से यह भी पता चलता है कि स्लीपर श्रेणी में पिछले वर्ष की तुलना में इस साल औसतन प्रतीक्षा सूची नीचे आई है.

    अध्ययन रिपोर्ट के मुताबिक, दिवाली के अवकाशों के समय देहरादून-हावड़ा दून एक्सप्रेस, पुणे-जम्मू तवी झेलम एक्सप्रेस समेत कई लंबी दूरी की ट्रेनों में टिकट पक्की होने की दर वर्ष 2016 में क्रमश: 38.50 प्रतिशत और 52.00 प्रतिशत थी. इसके मुकाबले 2017 में इनमें कन्फर्मेशन दर बढ़कर क्रमश: 60.40 प्रतिशत और 64. 90 प्रतिशत हो गई. इसी तरह, छत्रपति टर्मिनस से हावड़ा सुपरफाट मेल (गया के रास्ते) में टिकट पक्की होने की दर 2016 में 40.0 प्रतिशत के मुकाबले 2017 में दिवाली के दौरान 50.40 प्रतिशत हो गई है. इसी प्रकार, पुणे-जम्मूतवी झोल एक्सप्रेस, पुणे-दानापुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस और बैंगलोर-दानापुर संघमित्रा सुपरफास्ट एक्सप्रेस में भी टिकट पक्की होने की स्थिति सुधरी.

    अध्ययन के अनुसार रेलवे में टिकट निरस्त कराने की दर पिछले दो साल से 18 प्रतिशत है. इसका मतलब है कि शेष प्रतीक्षा सूची के यात्रियों को पक्की टिकट मिली. वर्ष 2015 में प्रतीक्षा सूची के टिकटों के निरस्तीकरण की दर 25.5 प्रतिशत थी जो 2016 और 2017 में 18 प्रतिशत पर बरकरार है.

    रेल यात्री के सह संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी मनीष राठी ने कहा, ‘‘हर साल दीवाली एवं अन्य त्यौहारों के दौरान रेल टिकट की भारी मांग होती है और कई यात्री को पक्की टिकट नहीं मिल पाती. हालांकि आंकड़ों से पता चलता है कि कुछ ही लोगों को अपने टिकट निरस्त करने पड़े.’’ अध्ययन में यह भी कहा गया है स्लीपर श्रेणी में पिछले वर्ष की तुलना में इस साल औसतन प्रतीक्षा सूची नीचे आई है. इसके अनुसार अवकाश के दौरान , ‘‘कोटा-पटना एक्सप्रेस में स्लीपर श्रेणी में 2016 में औसतन प्रतीक्षा सूची 813 थी जो 2017 में घटकर 735 पर आ गई. वहीं भागलपुर-मुंबई लोकमान्य तिलक सुपर फास्ट एक्सप्रेस में प्रतीक्षा सूची 2017 में घटकर 727 पर आ गई जो 2016 में 736 थी. इसी प्रकार, अहमदाबाद-हरिद्वार योग एक्सप्रेस, यंशवंतपुर-हावड़ा सुपरफास्ट एक्सप्रेस जैसे ट्रेनों में भी प्रतीक्षा सूची घटी है.’’

    राठी का कहना है कि इसका एक प्रमुख कारण रेलवे द्वारा दिवाली के समय 29 विशेष ट्रेनें तथा कुछ नई ट्रेनों को चलाना है.’’ रेल यात्री ऐप को उपयोग करने वालों की संख्या करीब 50 लाख है. अध्ययन में ऐप उपयोग करने वालों से प्राप्त आंकड़ों तथा अन्य स्रोतों से ली गई जानकारी का उपयोग किया गया है.

  • 1 साल में 127% महंगा हुआ प्याज, सब्जियों के दाम भी दोगुना से ज्यादा बढ़े
    PUBLISHED : Nov 15 , 8:45 AM


  • एक साल पहले अक्टूबर में थोक मुद्रास्फीति 1.27 प्रतिशत रही थी. अक्टूबर 2017 की मुद्रास्फीति इस साल अप्रैल के बाद सबसे ऊंची है. 
    नई दिल्ली. प्याज, दूसरी सब्जियों सहित खाने-पीने के सामान के दाम बढ़ने से अक्टूबर महीने में थोक महंगाई 3.59 प्रतिशत पर पहुंच गई. यह इसका पिछले छह महीने का उच्च स्तर है. थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति इससे पिछले महीने सितंबर में 2.60 प्रतिशत पर थी. एक साल पहले अक्टूबर में थोक मुद्रास्फीति 1.27 प्रतिशत रही थी. अक्टूबर 2017 की मुद्रास्फीति इस साल अप्रैल के बाद सबसे ऊंची है. अप्रैल में यह 3.85 प्रतिशत दर्ज की गई थी. इससे पहले कल जारी आंकड़ों में अक्टूबर रिटेल महंगाई भी सात महीने के उच्चतम 3.58 प्रतिशत पर रही.गई.

    127.04 प्रतिशत के बढ़े प्याज के दाम
    प्याज की बात करें तो अक्टूबर में प्याज के दाम में एक साल पहले के मुकाबले 127.04 प्रतिशत बढ़ गए हैं. अंडा, मीट और मछली के दाम 5.76 प्रतिशत ऊंचे रहे. हालांकि, विनिर्माण क्षेत्र के उत्पादों में मुद्रास्फीति मामूली घटकर 2.62 प्रतिशत रह गई जो कि सितंबर में 2.72 प्रतिशत थी.

    पेट्रोल और बिजली के दाम भी बढ़े
    ईंधन और बिजली वर्ग में अक्टूबर में मुद्रास्फीति बढ़कर 10.52 प्रतिशत हो गई. ईंधन मुद्रास्फीति पिछले तीन महीने से लगातार ऊंची बनी हुई है. विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ने के बाद पेट्रोल, डीजल के दाम लगातार ऊंचे बने हुए हैं. घरेलू उत्पादन घटने से बिजली शुल्क भी उच्च स्तर पर बने हुए हैं. इसके विपरीत दाल-दलहन के दाम में गिरावट का दौर जारी है. दलहन में 31.05 प्रतिशत की गिरावट रही. आलू के दाम 44.29 प्रतिशत घट गये जबकि गेहूं 1.99 प्रतिशत नीचे रहा.

  • GST: घर बनाने का सामान, शैंपू, डिटर्जेंट, चॉकलेट समेत 213 चीजें हुईं सस्ती,
    PUBLISHED : Nov 11 , 5:29 AM


  • जीएसटी परिषद ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लेते हुए 213 वस्तुओं पर टैक्स घटाने का फैसला किया। इसमें सबसे बड़ा ऐलान 28 प्रतिशत की अधिकतम टैक्स दर से 178 वस्तुओं को 18 प्रतिशत पर लाने का रहा। इसे आम जनता और उद्योगों के लिए बजट के पहले बहार माना जा रहा है।

    वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की 23वीं बैठक में ये निर्णय किए गए। जेटली ने बैठक के बाद कहा कि उच्चतम टैक्स स्लैब की 228 वस्तुओं से रोजमर्रा के इस्तेमाल से जुड़ी 178 को 18 प्रतिशत की श्रेणी में लाया गया है। यह जीएसटी लागू होने के चार माह में सबसे बड़ा बदलाव है। यह घोषणा इस मायने में अहम है कि मंत्रिसमूह ने 165 वस्तुओं को ही 28 से 18 फीसदी में लाने की सिफारिश की थी, लेकिन परिषद ने 12 अन्य वस्तुओं पर टैक्स घटाने पर मुहर लगाई। 

    पढ़े : क्या सस्ता हुआ क्या महंगा :

    1. इन पर दरें 28 से 18% हुईं

    28 से 18 प्रतिशत टैक्स स्लैब में फर्नीचर, बिजली के सामान, बक्से, बैग, टॉयलेट क्लीनर, लैंप, पंखा, पंप, कुकर, स्टोव सूटकेस, डिटर्जेंट, सौंदर्य उत्पाद, शेविंग-ऑफ्टर शेविंग उत्पाद शू पॉलिश,न्यूट्रिशन पाउडर, डियोड्रेंट, चॉकलेट, न्यूट्रिशन पाउडर जैसी आम उपभोग की वस्तुएं होंगी। वॉश बेसिन, नल टोटी,शॉवर, पाइप जैसी सैनिटरी उत्पाद भी सस्ते होंगे। बिजली के कई सामान, प्लाईवुड, मशीनरी, मेडिकल उपकरण, फ्लोरिंग पर भी 18 प्रतिशत टैक्स लगेगा। निर्माण क्षेत्र में इस्तेमाल वाले ग्रेनाइट, फ्लोरिंग और मार्बल पर भी कर 28 से 18 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि रंग रोगन और सीमेंट को 28 प्रतिशत कर दायरे में ही रखा गया है। 

    2. एसी-फ्रिज, वॉशिंग मशीन पर 28% टैक्स
    अधिकतम टैक्स स्लैब में अब पान मसाला, सॉफ्ट ड्रिंक, तंबाकू, सिगरेट समेत सिर्फ 50 वस्तुएं ही रहेंगी। सीमेंट, पेंट और एयर कंडीशनर, परफ्यूम, वैक्यूम क्लीनर, फ्रिज, वॉशिंग मशीन भी इस श्रेणी में बने रहेंगे। कार, दोपहिया वाहन और विमान भी इस दायरे में होंगे।

    3. इन पर दरें 28 से 12% हुईं
    पत्थर तोड़ने वाले स्टोन क्रशर और टैंक व अन्य युद्धक वाहनों पर जीएसटी दरें 16 फीसदी तक घटा दी गई हैं।

    4. इन वस्तुओं पर 18 से घटकर 12% कर
    कंडेंश्ड मिल्क, शुगर क्यूब्स, पास्ता, डायबिटिक फूड, छपाई स्याही, हैंड बैग, शॉपिंग बैग, कृषि में इस्तेमाल कुछ मशीनें, सिलाई मशीनें, बांस से बने फर्नीचर आदि।

    5. इन पर 18 से 5% पहुंचा जीएसटी
    रेवड़ी, तिल रेवड़ी, खाजा, चटनी पाउडर, फ्लाई ऐश आदि

    6. 12 नहीं 5% जीएसटी
    सूखा नारियल, इडली, दोसा, मछली पकड़ने का जाल और हुक, तैयार चमड़े, फ्लाई ऐश से बनी ईंट आदि।

    7. इन पर जीएसटी 5% से 0%
    ग्वार के खाद्य पदार्थ, स्वीट पोटैटो सहित कुछ सूखी सब्जियां, फ्रोजेन या सूखी मछली, खांडसारी सुगर।

    8. लाख की चूड़ियां सस्ती
    जीएसटी परिषद ने एयरक्राफ्ट इंजिन पर जीएसटी दर 28 और 18 से घटाकर 5% कर दी हैं। इसके अलावा एयरक्राफ्ट टायर पर जीएसटी 28 से 5% कर दी गई है। इसी तरह लाख की चूड़ियों पर 3% जीएसटी को भी खत्म कर शून्य कर दिया गया है।

    9. रेस्तरां का बिल भी सस्ता होगा
    जीएसटी परिषद ने ग्राहकों को बड़ी राहत देते हुए एसी रेस्तरां में सेवा कर घटाने का फैसला किया है। यहां जीएसटी की दरों को 18 से घटाकर 5 फीसदी करने का फैसला किया गया है। हालांकि फाइव स्टार होटलों को इस पर छूट नहीं दी गई है।

    10. इन चीजों पर राहत नहीं
    माना जा रहा है कि परिषद पेंट, सीमेंट, वॉशिंग मशीन, फ्रिज और तंबाकू जैसे सामानों पर जीएसटी दरों में कोई राहत नहीं देगी।

  • नोटबंदी के बाद मोदी सरकार ने करीब सवा दो लाख फर्जी कंपनियों पर जड़ा ताला
    PUBLISHED : Nov 06 , 8:31 AM


  • केंद्र सरकार ने करीब सवा दो लाख फर्जी कंपनियों पर ताला जड़ दिया है. कालेधन के प्रवाह पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से मोदी सरकार ने यह कार्रवाई की है.
    नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने करीब सवा दो लाख फर्जी कंपनियों पर ताला जड़ दिया है. कालेधन के प्रवाह पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से मोदी सरकार ने यह कार्रवाई की है. सरकार ने एक जानकारी देते हुए कहा है कि करीब 35,000 कंपनियों ने नोटबंदी के बाद 17,000 करोड़ रुपये जमा कराए थे, जिसे बाद में निकाल लिया गया था. कालेधन के प्रवाह पर अंकुश के लिए उठाए गए कदमों के तहत अभी तक 2.24 लाख निष्क्रिय कंपनियों का नाम आधिकारिक रिकॉर्ड से हटा दिया गया है और 3.09 लाख निदेशकों को अयोग्य घोषित किया गया है. कंपनियों के बोर्ड में डमी निदेशकों की नियुक्त रोकने के लिए एक ऐसी व्यवस्था स्थापित की जा रही है जिसमें निदेशक के लिए नए आवेदनों को संबंधित व्यक्ति के पैन या आधार नंबर से जोड़ा जाएगा.

    सरकारी बयान में कहा गया है कि अभी तक 2.24 लाख कंपनियों का नाम आधिकारिक रिकॉर्ड से हटाया गया है. ये कंपनियां दो या अधिक साल से निष्क्रिय थीं. बयान में कहा गया है कि बैंकों से मिली शुरुआती सूचना के अनुसार 35,000 कंपनियों से जुड़े 58,000 बैंक खातों में नोटबंदी के बाद 17,000 करोड़ रुपये जमा कराए गए थे, जिसे बाद में निकाल लिया गया. इसमें कहा गया है कि एक कंपनी जिसके खाते में 8 नवंबर, 2016 को को कोई जमा नहीं थी, ने नोटबंदी के बाद 2,484 करोड़ रुपये जमा कराए और निकाले.

    पिछले साल नवंबर में सरकार ने कालेधन और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए 500 और 1,000 के नोटों को बंद कर दिया था. सरकार ने कहा कि एक कंपनी ऐसी थी जिसके 2,134 खाते थे. इस तरह की कंपनियों से संबंधित सूचनाओं को प्रवर्तन अधिकारियों से आगे की कार्रवाई के लिए साझा किया गया है. पंजीकरण रद्द कंपनियों के संदर्भ में राज्य सरकारों को सलाह दी गई है कि ऐसी इकाइयों की संपत्तियों के पंजीकरण की अनुमति नहीं दें.

  • सोने के गहनों पर हॉलमार्किंग जनवरी से अनिवार्य: रामविलास पासवान
    PUBLISHED : Nov 04 , 1:01 PM


  • खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री रामविलास पासवान ने शुक्रवार को कहा कि सरकार देश में बेचे जाने वाले सोना और आभूषणों के लिए कैरेट गणना के साथ उनकी हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने की योजना बना रही है।

    भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के आयोजन में पासवान ने संवाददाताओं से कहा कि मौजूदा समय में लोगों को पता नहीं होता कि उनके द्वारा खरीदी जाने वाली स्वर्ण आभूषण की गुणवत्ता क्या है। हम स्वर्ण आभूषण की हॉलमार्किंग को अनिवार्य बनाने की योजना बना रहे हैं। यह काम जनवरी तक हो जाना चाहिए। 

    उन्होंने कहा कि कुछ आभूषणों पर बीआईएस मार्क का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन यह पर्याप्त रूप से उपभोक्ताओं को आभूषणों की गुणवत्ता के बारे में जानकारी नहीं दे पाता। प्रस्तावित कानून के तहत हॉलमार्क में आभूषण में इस्तेमाल किए गए सोने के कैरेट के बारे में उल्लेख किया जाएगा। यह 14 कैरेट, 18 कैरेट और 22 कैरेट वाली श्रेणियों के लिए किया जाएगा।

  • ईज आॅफ डूइंग बिजनेस:भारत ने लगाई लंबी छलांग, शीर्ष 100 में शामिल
    PUBLISHED : Nov 01 , 9:07 AM


  • वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में व्यापार में सुगमता के मामले में भारत ने लंबी छलांग लगाई है। 'ईज आॅफ डूइंग बिजनेस' इंडेक्स में भारत ने 30 स्थानों की छलांग लगाते हुए 100वें नंबर पर पहुंच गया है। पिछले साल भारत 130वें स्थान पर रहा था। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इसकी जानकारी दी। गौरतलब है कि विश्व बैंक हर साल यह सूची जारी करता है, इस सूची में कुल 159 देश शामिल हैं।

    आठ क्षेत्रों में भारत का बेहतर प्रदर्शन
    यह पहला मौका है जब भारत ने कारोबार सुगमता के किसी भी पैमाने पर शीर्ष पांच देशों में जगह सुरक्षित की है। रिपोर्ट के अनुसार,   भारत ने छोटे निवेशकों के हितों की सुरक्षा, ऋण उपलब्धता और विद्युत उपलब्धता के क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन किया है। देश के कंपनी कानून और प्रतिभूति नियमन को काफी उन्नत माना गया है। भारत को छोटे निवेशकों के हितों की रक्षा के पैमाने पर विश्व में चौथे स्थान पर रखा जा रहा है।  विश्व बैंक की हालिया  डूइंग बिजनेस 2018: रिफॉर्मिंग टू क्रियेट जॉब्स  रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले एक साल के दौरान भारत ने सुधारों के 10 में से आठ क्षेत्रों में उल्लेखनीय बेहतर प्रदर्शन किया है।

    क्या है रिपोर्ट में 
    रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने कारोबार शुरू करने, निर्माण कार्य के लिए परमिट लेना और दिवालिएपन के निपटारे के मामले में अच्छा काम किया है। इन मामलों में उसे पिछली बार क्रमश: 155, 186 और 136 रैंक मिली थी। पिछली बार कमजोर रैंक ने भारत को बेहतर करने के लिए प्रेरित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुधार को लेकर उठाए गए त्वरित फैसलों ने भारत की रैंकिंग सुधारी। आने वाले समय में अगर सुधार की यही रफ्तार जारी रहती है तो भारत की रैंकिंग में दोगुने की छलांग लग सकती है।

    रैंकिंग सुधरने की वजह
    केंद्र सरकार ने पिछले एक साल में कई बड़े कदम उठाए हैं। इसमें देश का ऐतिहासिक टैक्स रिफॉर्म जीएसटी भी शामिल हैं। विदेशी निवेश के मामले में भारत चीन को पीछे छोड़कर नंबर एक देश बन चुका है। सूत्रों के मुताबिक, जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है तब से अब तक देश में करीब 170 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आ चुका है।

    कितनी रैंक
    2014-15    142   
    2015-16    131   
    2016-17    130
    2017-18    100

    कौन कौन से शहर
    यह रिपोर्ट दो जून 2016 से एक जून 2017 के दौरान दिल्ली एवं मुंबई में क्रियान्वयन में लाये गये सुधारों पर आधारित है। इस दौरान स्थायी खाता संख्या (पैन) और कर खाता संख्या (टैन) के आवेदनों को मिलाकर नयी दिल्ली में कारोबार की शुरआत करने की प्रक्रिया तेज की गयी है। इसी तरह मुंबई में मूल्य वर्धित कर और पेशा कर के आवेदनों को मिलाकर कारोबार शुरू करना आसान किया गया है। वर्ल्ड बैंक की इस रिपोर्ट के मुताबिक व्यापार करने के मामले में पंजाब का शहर लुधियाना पहले पायदान पर है तो देश की राजधानी दिल्ली को ईज आॅफ डूइंग बिजनेस के मामले में छठे नंबर पर रखा गया है।

  • 1 नवंबर से रेलवे में बदल जाएगा बहुत कुछ, आपके लिए जानना है जरूरी
    PUBLISHED : Oct 28 , 9:12 AM

  • जिन ट्रेनों का समय बदला जा रहा है, उनमें झांसी डिविजन की 20, आगरा की 18 और इलाहाबाद डिविजन की 48 ट्रेनें हैं. ट्रेनों के समय में 15 मिनट से लेकर 2 घंटे तक का बदलाव किया गया है.
    नई दिल्ली : रेलवे मिनिस्ट्री 1 नवंबर से कई बदलाव करने वाली है, इसके लिए मंत्रालय की तरफ से पूरी तैयारी भी की जा चुकी है. ये ऐसे बदलाव हैं, जिनके बारे में आपको जानना जरूरी है. इस बदलाव के बाद आम यात्रियों को काफी फायदा होने की उम्मीद की जा रही है. आपको बता दें कि 1 नवंबर से कई ट्रेनों के टाइम और नंबर में बदलाव किया जा रहा है. इस चेज के पीछे रेलवे का मकसद है कि ट्रेनें लेट न हो और यात्री अपने गंतव्य पर समय से पहुंचे. इसके अलावा कुछ ट्रेनों की स्पीड भी बढ़ाई जा रही है.

    जिन ट्रेनों का समय बदला जा रहा है, उनमें झांसी डिविजन की 20, आगरा की 18 और इलाहाबाद डिविजन की 48 ट्रेनें हैं. ट्रेनों के समय में 15 मिनट से लेकर 2 घंटे तक का बदलाव किया गया है. 1 नवंबर से ही लंबी दूरी वाली 700 ट्रेनों की यात्रा अवधि कम होने जा रही है. 48 पुरानी ट्रेनों को सुपरफास्ट ट्रेन में बदलने की भी योजना है. वहीं कुछ ट्रेनों की एवरेज स्पीड बढ़ाकर 55 किलोमीटर प्रतिघंटा या उससे ज्यादा की जाएगी.

    ये भी पढ़ें : रेलवे ने ट्विटर पर ही फाइनल कर दी डील, आप भी हो जाओगे हैरान

    इन ट्रेनों में किया जाएगा बदलाव

        12571/12572 गोरखपुर-आनंद विहार हमसफर एक्सप्रेस (साप्ताहिक)
        19305/19306 इंदौर-गुवाहाटी (साप्ताहिक)
        22433/22434 आनंद विहार-गाजीपुर सिटी (सप्ताह में दो दिन)
        22427/22428 आनंद विहार-बलिया (साप्ताहिक)
        16793/16794 रामेश्वरम-फैजाबाद (साप्ताहिक)
        15065/15066 गोरखपुर-पनवेल (सप्ताह में चार दिन)
        15067/15068 गोरखपुर-बांद्रा (साप्ताहिक)
        22163/22164 भोपाल-खजुराहो (प्रतिदिन)
        22167/22168 सिंगरौली-निजामुद्दीन (साप्ताहिक)
        19041/09042 बांद्रा-गाजीपुर सिटी (सप्ताह में दो दिन)
        14117/14118 इलाहाबाद-बस्ती (सप्ताह में पांच दिन)
        15063/15064 गोरखपुर-लोकमान्य तिलक (साप्ताहिक)
        17323/17324 हुबली-वाराणसी (साप्ताहिक)
        20903/20904 वडोदरा-वाराणसी महामना एक्स. (साप्ताहिक)
        11901/11902 मथुरा-कुरुक्षेत्र (सप्ताह में पांच दिन)

    इनका बदलेगा टाइम और नंबर
    भारतीय रेलवे की नई समय सारणी लागू होने के बाद उधमपुर ट्रेन सुपरफास्ट हो जाएगी. मंत्रालय की तरफ से इसकी स्पीड बढ़ाई जाएगी. जिन ट्रेनों के समय में बदलाव किया जाएगा, उनमें 19046 छपरा-सूरत एक्सप्रेस, 12295 संघमित्रा एक्सप्रेस, 12427 रीवा एक्सप्रेस, उधमपुर एक्सप्रेस, 15548 एलटीटी-जयनगर, 12168 वाराणसी-एलटीटी और 14115 हरिद्वार एक्सप्रेस हैं.

  • वित्त मंत्री अरुण जेटली ने दिलाया भरोसा:कहा-अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत
    PUBLISHED : Oct 25 , 7:15 AM


  • वित्त मंत्री अरूण जेटली ने शनिवार को घरेलू अर्थव्यवस्था की बुनियाद को मजबूत करार देते हुए कहा कि आर्थिक वृद्धि की गति को तेज बनाये रखने के उपाय किये जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत पिछले तीन साल से सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है और आने वाले वर्षों में इस रफ्तार को बनाये रखने के लिये प्रयास जारी हैं। वित्त मंत्री जेटली ने देश की अर्थव्यवस्था की स्थिति पर विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान दिए गए प्रस्तुतीकरण में आर्थिक मामलों के सचिव एससी़ गर्ग ने कहा कि मुद्रास्फीति वर्ष 2014 से लगातार नीचे आ रही है और चालू वित्त वर्ष में भी यह चार प्रतिशत से ऊपर नहीं जाएगी।

    अर्थव्यवस्था के वृहद आर्थिक संकेतकों के बारे में उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में चालू खाते का घाटा दो प्रतिशत से कम होगा और विदेशी मुद्रा भंडार 400 अरब डालर से अधिक हो चुका है। राजकोषीय घाटे के बारे में गर्ग ने कहा कि सरकार इसे चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.2 प्रतिशत के लक्ष्य के दायरे में रखने के लिये प्रतिबद्ध है। हालांकि सरकार दिसंबर में इसकी समीक्षा करेगी।

    जीडीपी सुस्ती अब समाप्त
    उन्होंने कहा कि जीडीपी वृद्धि में आई सुस्ती अब समाप्त हो चली है और अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ने लगी है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी हाल ही में कहा है कि भारत जल्द ही आठ प्रतिशत वृद्धि हासिल करेगा। गर्ग ने कहा कि सरकार को चालू वित्त वर्ष के लिए तय 72,500 करोड़ रूपये के विनिवेश लक्ष्य को हासिल कर लेने का भरोसा है।

    सरकारी खर्च 11.47 लाख करोड़
    वित्त सचिव अशोक लवासा ने इस अवसर पर कहा कि इस वित्त वर्ष में अब तक सरकारी खर्च 11.47 लाख करोड़ रूपये हो चुका है। चालू वित्त वर्ष के लिये कुल खर्च 21.46 लाख करोड़ रूपये रखा गया है। वर्ष के दौरान 3.09 लाख करोड़ रूपये के पूंजी व्यय लक्ष्य के समक्ष अब तक 1.46 लाख करोड़ रूपये का खर्च किया जा चुका है।

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