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  • हेल्दी लाइफस्टाइल से बुढ़ापे में भी दिमाग बनेगा स्मार्ट
    PUBLISHED : Sep 12 , 8:28 AM


  • न्यूयॉर्क:  अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (एएचए) के एक नए परामर्श के मुताबिक, यदि आप अपने आने वाले वर्षो में भी स्मार्ट रहना चाहते हैं? तो आपको बचपन से ही एक स्वस्थ जीवनशैली बनानी होगी, क्योंकि यह उम्र में एक संज्ञानात्मक गिरावट के विकास के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है. रक्तचाप, कोलेस्ट्रोल और रक्त शर्करा के स्तर में वृद्धि बड़े और छोटे रक्त कणों को नुकसान पहुंचा सकती है, उन्हें संकुचित बनाते हुए जाम कर सकती है. इसे एथरोस्क्लेरोसिस नाम से भी जाना जाता है, जो कि एक बीमारी की प्रक्रिया है, जो कई दिल के दौरों और स्ट्रोक का प्रमुख कारण है. अध्ययन में पता चला है कि यदि मौजूदा चलन कायम रहता है तो दुनिया भर में 7.50 लोग पागलपन के शिकार हो सकते हैं.

    मिशिगन स्टेट युनिवर्सिटी के प्रोफेसर फिलिप गोरलिक ने कहा कि अध्ययन, "आश्वस्त रूप से यह दर्शाता है कि एक ही जोखिम वाले कारक एथरोस्क्लेरोसिस का कारण बनते हैं और साथ ही अधिक उम्र में संज्ञानात्मक हानि और अल्जाइमर रोग में भी योगदान करते हैं."

    स्वास्थ्य कारक,  जिसे 'जीवन का सरल 7 कार्यक्रम' कहा जाता है. ये लोगों के रक्तचाप को प्रबंधित करने, कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने, रक्त शर्करा को सामान्य रखने, शारीरिक रूप से सक्रिय रहने, स्वस्थ आहार लेने, अतिरिक्त वजन घटाने, धूम्रपान न करने या छोड़ने का आग्रह करते हैं.

    मिशिगन के मर्सी हेल्थ ह्यूनस्टीन न्यूरोसाइंसेस में वैस्कुलर न्यूरोलॉजिस्ट और चिकित्सा निदेशक, गॉर्लिकिक ने कहा है, "जीवन के सरल 7 का अनुसरण करके हम न केवल दिल के दौरों और स्ट्रोक को रोक सकते हैं, बल्कि हम संज्ञानात्मक हानि को रोकने में भी सक्षम हो सकते हैं."

    यह परामर्श 182 प्रकाशित वैज्ञानिक अध्ययनों और स्ट्रोक नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययनों की समीक्षा के आधार पर दी गई है, और आपके मस्तिष्क को यथासंभव स्वस्थ रखने के लिए कदम उठाने के महत्व पर बल देती है, क्योंकि एथ्रोरोस्लेरोसिस बचपन में ही शुरू हो जाता है.

  • भारतीय उपाय: आंखों को रखना है जवां तो अपनाएं ये देशी आदतें
    PUBLISHED : Aug 27 , 9:05 AM

  • प्रदूषित वातावरण, धूल- मिट्टी, पूरे दिन टीवी, मोबाइल और कंप्यूटर के सामने बैठे रहना ये कुछ ऐसी चीजें हैं जो हमारी आंखों को नुकसान पहुंचाती हैं। जिसके कारण आंखों में दर्द, जलन और चुभन जैसी समस्या से हम ग्रसित हो जाते हैं।

    1- सुबह-सुबह नंगे पांव ओस पड़ी हरी घास पर चलने से आंखों की रोशनी तेज होती है।

    2- सबसे पहले ध्यान के आसन में बैठ जाएं। फिर 6 से 7 मीटर दूर रखी किसी चीज को एक टक देखते रहें। इस तरह से ध्यान लगाने से चुभती हुई आंखों को आराम मिलता है।

    3- यह तरीका बहुत ही पुराना है। दोनों हाथेलियों को आपस में 10 से 15 मिनट रगड़े और उसके बाद हल्के से दोनों हाथों को आखों के ऊपर रखें। इससे आंखों को तुरंत आराम मिलेगा।

    4- अगर कंप्यूटर, लेपटॉप या मोबाइल के सामने हों तो हर 3 से 4 सेकेंड बाद पलकों को झपकाते रहिए। ऐसा करने से आंखों की कसरत होगी जिससे आराम मिलेगा।
    5- दस बार आंखों को ऊपर-नीचे, दस बार आंखों को दाएं-बाएं तथा दस बार वृत्ताकार घूमाने से आंखों की अच्छी मालिश होती है और इससे आंखों पर पड़ने वाला तनाव भी कम होता है।

    6- आंखों की जलन को दूर करने के लिए विटामिन आयरन का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। इसलिए गाजर आम, पपीता, आजवाइन, रसदार फल, दूध और मक्खन का प्रयोग करना चाहिए। आंखों को आराम देने के लिए सात से आठ घंटा नींद लीजिए।

    7- प्राणायाम करने से दिमाग स्थिर रहता है और आंखों की रोशनी बनी रहती है। आप आखों की जलन को दूर करने के लिए योग में शवासन और सर्वागासन भी कर सकते हैं।

    8- आंख के जलन को दूर करने के लिए आप ठंडी चम्मच को अपनी आंख पर लगाएं। इसके लिए आप पहले बर्फ का पानी एक गिलास लें और उसमें एक चम्मच डालें। फिर ठंडी होने के बाद उस चम्मच को निकालकर उसे आपनी आंखों पर लगाएं।

    ध्यान दें-

    इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य व सटीक हैं तथा इन्हें अपनाने से अपेक्षित परिणाम मिलेगा। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

  • त्वचा संबंधी रोगों में फायदेमंद है तुलसी
    PUBLISHED : Aug 16 , 8:28 AM


  • पौराणिक महत्व के अलावा तुलसी एक जानी-मानी औषधि भी है, जिसका इस्तेमाल कई बीमारियों में किया जाता है। सर्दी-खांसी से लेकर कई बड़ी और भयंकर बीमारियों में भी एक कारगर औषधि है। आयुर्वेद में तुलसी के पौधे के हर भाग को स्वास्थ्य के लिहाज से फायदेमंद बताया गया है। तुलसी की जड़, उसकी शाखाएं, पत्ती और बीज सभी का अपना-अपना महत्व है।

    आइए जानें तुलसी के फायदे
    अगर आपको सर्दी या फिर हल्का बुखार है तो मिश्री, काली मिर्च और तुलसी के पत्ते को पानी में अच्छी तरह से पकाकर उसका काढ़ा पीने से फायदा होता है। आप चाहें तो इसकी गोलियां बनाकर भी खा सकते हैं।

    अगर आप दस्त से परेशान हैं तो तुलसी के पत्तों का इलाज आपको फायदा देगा। तुलसी के पत्तों को जीरे के साथ मिलाकर पीस लें, इसके बाद दिन में तीन-चार बार चाटते रहें। ऐसा करने से दस्त रुक जाती है।

    सांस की दु्र्गंध को दूर करने में भी तुलसी के पत्ते काफी फायदेमंद होते हैं और नेचुरल होने की वजह से इसका कोई साइडइफेक्ट भी नहीं होता है। अगर आपके मुंह से बदबू आ रही हो तो तुलसी के कुछ पत्तों को चबा लें। ऐसा करने से दुर्गंध चली जाती है।

    अगर आपको कहीं चोट लग गई हो तो तुलसी के पत्ते को फिटकरी के साथ मिलाकर लगाने से घाव जल्दी ठीक हो जाता है। तुलसी में एंटी-बैक्टीरियल तत्व होते हैं जो घाव को पकने नहीं देते है। इसके अलावा तुलसी के पत्ते को तेल में मिलाकर लगाने से जलन भी कम होती है। त्वचा संबंधी रोगों में तुलसी खासकर फायदेमंद है. इसके इस्तेमाल से कील-मुहांसे खत्म हो जाते हैं और चेहरा साफ होता है।

  • मानसून के दौरान होने वाली बीमारियों से दांतों को ऐसे रखें हेल्दी
    PUBLISHED : Aug 08 , 8:29 AM


  • नई दिल्ली: मानसून के दौरान दांतों से संबंधित कई समस्याएं हो सकती हैं, जो दांतों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए टूथब्रश बदलना जरूरी है और नियमित रूप से दांतों को फ्लॉस (दांत साफ करने वाला धागा) करें. आर्थोडोंटिक क्लीनिक डेंटेम की निदेशक गुनिता सिंह और सर गंगा राम हॉस्पिटल के सीनियर ऑर्थोडोंटिस्ट तन्वीर सिंह ने उन सावधानियों के बारे में बताया, जिससे दांतों को स्वस्थ रखा जा सकता है -

    - अपने टूथब्रश को अक्सर बदलते रहें और नया टूथब्रश इस्तेमाल करें क्योंकि इससे मुंह की स्वच्छता को बरकरार रखने में मदद मिलती है.

    - नियमित रूप से फ्लॉस करना चाहिए। सुझाए गए फ्लॉस की लंबाई हर फ्लॉसिंग सेशन में 18 इंच है। दिन-प्रतिदिन के फ्लॉसिंग प्लान के हिसाब से एक महीने में यह करीब 45 फीट का हो जाएगा.

    - विटामिन सी और कैल्शियम युक्त उचित स्वास्थ्यपरक आहार के साथ मौसमी खाद्य पदार्थों और सब्जियों का सेवन जरूरी है. मानसून में सेब, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी, दही और ओट का सेवन लाभकारी होता है.

    - नियमित रूप से दांतों का चेकअप सभी के लिए जरूरी है। इससे न सिर्फ आपके दांत स्वस्थ रहेंगे बल्कि कोई समस्या होने पर शुरुआती अवस्था में ही इसका पता चल जाएगा.

    - इस मौसम में हम कॉफी या चाय जैसे गर्म पेय क खूब सेवन करते हैं, जिसमें कैफीन होता है, इससे आपके दांत खराब या कमजोर हो सकते हैं और उन पर दाग या कालापन हो सकता है, इसलिए दोनों का कम मात्रा में सेवन करने की कोशिश करें.
    ज़ी न्यूज़ डेस्क

  • सेना के जवानों को बहनों की राखियां मिलने पर होगा अपार हर्ष
    PUBLISHED : Jul 21 , 8:16 AM

  • मुख्यमंत्री श्री चौहान ने रक्षा रथ को किया रवाना


    मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि रक्षाबंधन पर्व के अवसर पर बहनों की राखियां और शुभकामना संदेश जब सरहद पर तैनात जवानों को मिलेगे, तब उनका मनोबल और आत्मबल कई गुना बढ़ जायेगा। इस भावनात्मक प्रयास के लिये नव दुनिया परिवार बधाई का पात्र है। श्री चौहान ने यह बात आज मुख्यमंत्री निवास में नवदुनिया की पहल पर भारत रक्षा पर्व के अंतर्गत रक्षा रथ की फ्लैग ऑफ सेरेमनी में कही। इस अवसर मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह भी मौजूद थीं।

    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हम अपने घरों में चैन से सोते हैं क्योंकि देश की सीमाओं पर हमारे जवान मुस्तैद रहते हैं। हमारे जवान सीमाओं की रक्षा के लिये होली, दीपावली और रक्षा बंधन आदि त्यौहार भी घर पर नहीं मनाते हैं। सदैव जान हथेली पर लेकर देश भक्ति के जज्बे के साथ सरहद की सुरक्षा करते हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा बंधन पर्व पर जब मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की हजारों बहनों की राखियां और शुभकामना संदेश लेकर नवदुनिया का रक्षा रथ उनके पास पहुंचेगा, तब जवानों को अपार हर्ष होगा, भावनात्मक प्रसन्नता की अनुभूति होगी। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक विधि विधान से रक्षा रथ को रवाना किया।

    इस अवसर पर बताया गया कि नवदुनिया द्वारा भारत रक्षा पर्व के अंतर्गत रक्षा रथ के माध्यम से मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भ्रमण कर बहनों से राखियां, ग्रीटिंग कार्ड और मैसेज का संकलन किया जा रहा है। संकलित सामग्री सेना के माध्यम से सीमा पर तैनात जवानों को उपलब्ध करवाई जायेगी।

    इस अवसर नवदुनिया के संपादक श्री सुनील शुक्ला, स्टेट ब्यूरो हेड श्री धनंजय प्रताप सिंह, श्री राजीव सोनी, हेड श्री विनित कौशिक सहित मॉडल स्कूल के एन.सी.सी.के छात्र एवं नव दुनिया के प्रतिनिधिगण मौजूद थे।
    अजय वर्मा

  • *कर्मचारियों को आनंद का पाठ पढ़ाएगी सरकार*
    PUBLISHED : Jul 17 , 9:24 AM


  • भोपाल।* राज्य सरकार शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों को आनंद का कोर्स कराएंगे। इसके लिए एक पाठ्यक्रम बनाया गया है। *'ए लाईफ ऑफ हैप्पीनेस एण्ड फुलफिलमेंट'* नामक इस पाठ्यक्रम को डॉ. राज रघुनाथन ने तैयार किया है। इस कोर्स को इण्डियन इंस्टीट्यूट ऑफ हैदराबाद भी उपलब्ध करा रहा है। यह ऑनलाइन पाठ्यक्रम होगा। इस कोर्स का नि:शुल्क अथवा सशुल्क दोनों तरह से अध्ययन किया जा सकेगा।
    शासकीय कर्मचारी को कोर्स की फीस का विभाग द्वारा अधिकतम बीस हजार रुपये भुगतान किया जाएगा। हालांकि कार्यक्रम की फीस इससे अधिक हो तो उसका भुगतान संबंधित सेवक को स्वत: करना होगा। कोर्स पूरा करने के बाद प्रमाण पत्र के आधार पर जो लोक सेवक राज्य आनंद संस्थान को प्रमाण पत्र भेजेंगे उनको संस्थान में आनंदक-रिसोर्स पर्सन के रूप में पंजीकृत किया जाएगा तथा आवश्यकतानुसार संपर्क कर उन्हेें स्वयं सेवक के रूप में कार्य करने का अवसर दिया जाएगा।
    वर्तमान में यह कोर्स अंग्रेजी भाषा  में उपलब्ध है। राज्य आनंद संस्थान द्वारा इसका अनुवाद किया जा रहा है। 3 माह के बाद इसका हिंदी संस्करण भी वेबसाइट पर उपलब्ध हो सकेगा।यह समस्त कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा डिपार्टमेंट आफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग ने शासकीय अधिकारियों के लिए मान्य किया हैं। यह सुविधा ऐसे नियमित एवं अनुबंध पर कार्य कर चुके अधिकारी एवं कर्मचारियों को मिल सकेगी, जो अपनी नौकरी के दौरान  तीन वर्ष की निरंतर सेवा दे चुके हो।
    आनंद विभाग द्वारा इन संस्थाओं से पृथक से एमओयू किया जा रहा है। इन संस्थाओं के कार्यक्रम की जानकारी और उनका कैलेण्डर एक सितंबर, 2017 से उपलब्ध होगा। जिसके बाद इस पाठ्यक्रम में भाग लेने के लिए अधिकारी-कर्मचारी को राज्य आनंद संस्थान के माध्यम से पंजीकृत होना होगा।

    *यह संस्थाएं कराएगी कोर्स*

         *संस्थान का नाम*
    1    द आर्ट ऑफ लीविंग फाउण्डेशन बैंगलोर-
            *कार्यक्रम का नाम*
    बिल्डींग कम्पेटेंसेस फार पर्सनल एक्सलेंस इन पब्लिक गवर्नेंस।

         *संस्थान का नाम*
    2     आईसी सेंटर फार अवर्नेंस (आईसीसीजी) पंजगंज-
            *कार्यक्रम का नाम*
        इथीक्स इन पब्लिक सर्विस

         *संस्थान का नाम*
    3    ईशा (फांउडेशन) योगा सेंटर कोयम्बटूर -
            *कार्यक्रम का नाम*
    इन्नेर इंजीनियरिंग लीडरशीप प्रोग्राम।


    *इनका कहना है*
    दफ्तर और आम जीवन शैली में आनंद (हेप्पनिंग) का माहौल बने, लोगों की लाइफ स्टाइल खुशनुमा हो इस उद्देश्य को ध्यान मेें रखते हुए यह कोर्स तैयार किया गया है।  इसे शासकीय कर्मचारी से लेकर एक आम आदमी तक कर सकता है। इस कोर्स का हिंदी पाठ्क्रम भी तैयार किया जा रहा है। जिसे जल्द ही आन-लाइन उपलब्ध कराया जाएगा।
    प्रवीण गंगराडे, संचालक राज्य आनंद संस्थान
    डा.नवीन जोशी

  • स्नातक परीक्षाओं में सेमेस्टर प्रणाली खत्म करने के आदेश जारी
    PUBLISHED : Jul 14 , 8:35 AM

  • स्नातकोत्तर परीक्षाओं में लागू रहेगी सेमेस्टर प्रणाली

    डॉ नवीन जोशी
    भोपाल।
    राज्य शासन के उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में बीए,बीकाम एवं बीएससी की स्नातक परीक्षाओं में सेमेस्टर प्रणाली खत्म करने के आदेश जारी कर दिये। अब सिर्फ स्नातकोत्तर परीक्षाओं में सेमेस्टर प्रणाली लागू रहेगी।
    आदेश में कहा गया है कि इसी शैक्षणिक सत्र वर्ष 2017-18 से स्नातक परीक्षाओं में वार्षिक पध्दति अपनाई जायेगी जिसमें वार्षिक तथा आंतरिक मूल्यांकन की व्यवस्थायें क्रमश: 80 एवं 20 के अनुपात में होगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नियामक संस्थाओं यथा एआईसीटीई यानी आल इण्डिया कौंसिल फार टेक्रिकल एजुकेशन, एनसीटीई यानी नेशनल कौंसिल फार टीचर एजुकेशन, बीसीआई यानी बार कौंसिल आफ इण्डिया आदि द्वारा स्नातक स्तर के निर्धारित पाठ्यक्रमों में, नियामक संस्थाओं के प्रावधानुसार निर्धारित प्रणाली को अपनाया जायेगा।

    केपी श्रीवास्तव बने राज्य शिक्षा केंद्र के लेखाधिकारी
    भोपाल।
    राज्य वित्त सेवा के अधिकारी कृष्ण प्रसाद श्रीवास्तव को राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल का लेखाधिकारी नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे लेखाधिकारी एमपीआरआरडीए सागर थे। इसी प्रकार, विकास आयुक्त कार्यालय भोपाल में लेखाधिकारी देरावर सिेह भाटी को मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम परिषद भोपाल में लेखाधिकारी के पद पर पदस्थ किया गया है। संयुक्त संचालक वित्त मप्र खादी एवं ग्रामोद्योग भोपाल ओपी पंथी को संचालनालय विमानन भोपाल में संयुक्त संचालक वित्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
    इसी प्रकार, प्रशासकीय अधिकारी जेएएच समूह ग्वालियर दिनेश पाठक को लेखाधिकारी मानसिक चिकित्सालय ग्वालियर, सहायक संचालक कोष एवं लेखा ग्वालियर संजय बाबू भदौरिया को लेखाधिकारी एमपीआरआरडीए सागर, लेखाधिकारी एमपीआरआरडीए पन्ना-1 सुनील श्रीवास्तव को प्रशासकीय अधिकारी जेएएच समूह ग्वालियर तथा जिला पेंशन अधिकारी छतरपुर अनिल कुमार खरे को वित्त नियंत्रक महाराजा छत्रसाल विवि छतरपुर पदस्थ किया गया है।
    दो पदोन्नत :
    राज्य वित्त सेवा के दो अधिकारियों को प्रवर श्रेणी वेतनमान में पदोन्नत कर उनकी नवीन पदस्थापना की गई है। पदोन्नति के बाद अब मप्र ग्रामीण आजीविका मिशन भोपाल में पदस्थ दिलीप कुमार सक्सेना उप संचालक के स्थान पर संयुक्त संचालक तथा सामान्य प्रशासन विभाग भोपाल में पदस्थ सतीश चन्द्र उपाध्याय अपर सचिव के स्थान पर उप सचिव हो गये हैं।
    डॉ नवीन जोशी

  • सोशल मीडिया का हद से ज्यादा इस्तेमाल, डाल सकता है रिलेशनशिप में दरार
    PUBLISHED : Jul 06 , 8:33 AM


  • आज के दौर में लाइफ जितनी सोशल हो चुकी है रिलेशन उतनी ही कॉम्पलीकेटड होती जा रही है. सोशल मीडिया के इस दौर में यह एक साइन है जो यह बताता है कि आप अपने रिश्ते में इंसिक्योर है. अगर आपका पार्टनर ये चीज बहुत अधिक करता है तो आपको चिंता करनी चाहिए.

    आपको जानकर आश्चर्य होगा कि अगर आपका पार्टनर सेशल मीडिया पर ज्यादा एक्टिव होता है तो हो सकता है कि वो इंसिक्योर महसूस करता हो. सामाजिक वैज्ञानिक अनुसंधान के अनुसार, फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया साइट एक प्रमुख इंडीकेटर हो सकता है. जो ये बताये कि आपका रिश्ता कितना मजबूत है.

    एक अध्ययन में पता चला है कि सोशल मीडिया किसी भी रिश्ते को बनाने और तोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. अनुसंधान के मुताबिक जो लोग अपने रिश्ते के बारे में ज्यादा सोचते हैं, वो लोग फेसबुक पर ज्यादा एक्टिव रहते हैं. जरूरत से ज्यादा फोटो अपलोड करते हैं. और जो लोग ज्यादा असुरक्षित फील करते हैं वो सोशल मीडिया पर अपने फोटोज ज्यादा शेयर करते हैं. इसका कारण ये भी हो सकता है कि अगर आपने कोई फोटो अपलोड की और उस पर ज्यादा लाइक और कमेंट आये तो आपक रिलेशन खतरे में पड़ सकता है. क्योकि आपका पार्टनर इस बार से जैलस फील कर सकता है.

    जो लोग अपने रिश्ते में ज्यादा खुश और सबसे ज्यादा सुरक्षित फील करते हैं, वो सोशल मीडिया से उनके रिश्ते को दूर रखने की कोशिश करते हैं. क्योंकि ऐसे लोग सोचते हैं कि उन्हें अपने रिश्ते को दुनिया को दिखाने की जरूरत नहीं है.

    जरूरत से ज्यादा सोशल मीडिया का उपयोग करना डिप्रेशन का शिकार माना जाता है, क्योंकि जो इस चीज का शिकार होते है वो अपने रिशते को दूसरों के रिशते से कम्पेयर करने की कोशिश करते हैं. वो दिखाते हैं कि उनका रिश्ता औरों से बेहतर है. लेकिन जो लोग असुरक्षित नहीं होते हैं वो अपनी जिंदगी जीते हैं. उन्हें किसी और से कोई मतलब नहीं होता है. वो एक-दूसरे के लिए टाइम निकालते हैं.

    वास्तव में ऐसा बिल्कुल नहीं है कि अगर आप में से कोई एक ज्यादा समय सोशल मीडिया पर बिताता है तो आपका रिश्ता टूट सकता है या आप एक-दूसरे से प्यार नहीं करते. लेकिन सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल करता है वो इंसक्योर हो सकता है.

  • नाइट शिफ्ट में काम करने से बुरी तरह प्रभावित होता है लीवर
    PUBLISHED : Jun 25 , 11:58 AM



  • लंदन : रात के वक्त यानी नाइट शिफ्ट में काम करना आपके स्वास्थय के लिए काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है. एक शोध में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि नाइट शिफ्ट में जिगर यानी लीवर बुरी तरह प्रभावित होता है. लिवर 24 घंटों में दिन और रात के हिसाब से भोजन और भूख के चक्र का आदी हो जाता है.

    रात की ड्यूटी यानी नाइट शिफ्ट के चलते आप समय पर भोजन नहीं कर पाते, जिसका सीधा असर आपके लिवर पर पड़ता है. शोधकर्ताओं ने चूहों पर प्रयोग कर पाया कि लिवर का आकार रात में बढ़ता है और वह खुद को ज्यादा खुराक के लिए तैयार करता है, लेकिन उसे समय पर उतनी खुराक नहीं मिल पाती.
    सेल नामक पत्रिका में प्रकाशित एक रिसर्च आधारित लेख में शोधकर्ताओं ने बताया है कि जब सामान्य जैविक क्रिया की लय उलट जाती है तो लिवर के घटने-बढ़ने की प्रक्रिया प्रभावित होती है.

    शोधकर्ताओं का कहना है कि व्यावसायिक बाधाओं या निजी आदतों के चलते हमारी जैविक घड़ी यानी बायोलॉजिकल क्लॉक और दिनचर्या बिगड़ती है. जिसका सीधा असर लिवर के महत्वपूर्ण कामकाज पर पड़ता है. प्रयोग के दौरान चूहों को रात में चारा दिया गया, जबकि दिन में आराम करने दिया गया.

    इस मामले में जिनेवा यूनिवर्सिटी के शोध प्रमुख फ्लोर सिंटूरल ने कहा कि हमने देखा कि रात में सक्रिय चरण यानी एक्टिव फेज़ के दौरान लिवर 40 प्रतिशत से अधिक बढ़ता है और दिन के दौरान यह शुरुआती आकार में वापस आ जाता है. बायोलॉजिकल क्लॉक में बदलाव से यह प्रक्रिया प्रभावित होती है.
    एजेंसी

  • 2000 और 500 के तर्ज पर अब आएगा एक रुपये का नया नोट
    PUBLISHED : Jun 02 , 8:39 AM


  • जल्द ही भारतीय रिजर्व बैंक 1 रुपए के नए नोट को जारी करेगा।  इस नए नोट के बाजार में आने के बाद भी मौजूदा नोट और सिक्‍के चलन में बने रहेंगे। नया नोट, जिसे सरकार द्वारा छापा जाता है, शुरुआती जानकारी के अनुसार एक रुपये का नया करेंसी नोट गुलाबी-हरे रंग का होगा और इसके पिछले हिस्‍से पर एक रुपए के सिक्‍के की तस्‍वीर छपी होगी। इस नए नोट पर आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास के हिंदी और अंग्रेजी में हस्‍ताक्षर होंगे। आपको बता दें की एक रुपये के नोट के अलावा बाकी सभी नोटों पर आरबीआई गवर्नर के हस्‍ताक्षर होते हैं, लेकिन केवल एक रुपए का नोट ऐसा है, जिस पर आर्थिक मामलों के सचिव के हस्‍ताक्षर होते हैं।

    नई तकनीक का होगा इस्तेमाल 
    नोटों की प्रिंटिंग में उच्च तकनीक का इस्तेमाल करने के बाद लागत में आई कमी आई है। इसको देखते हुए सेंट्रल बैंक दोबारा प्रिंटिंग पर विचार कर रहा है। फिलहाल देश में एक रुपए के सिक्के ढ़ाले जाते हैं। करीब 20 साल पहले आरबीआई ने एक रुपए का नोट छापना बंद कर दिया था। नए नोट अधिक सिक्योरिटी फीचर्स से लैस होंगे।
    ऐसा दिखेगा एक रुपये का नया नोट
    एक रुपए के नए नोट पर आरबीआई की जगह हिंदी और अंग्रेजी में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया लिखा होगा। इस नोट पर गवर्नर के सिग्‍नेचर नहीं होंगे। नोट का फ्रंट कलर फीका गुलाबी और हरे रंग का होगा।

    1 रुपए के नोट से जुड़े फैक्ट्स

        आरबीआइ ने प्रिंटिंग कॉस्ट अधिक होने के चलते 1994 मे एक रुपए के नोट की छपाई बंद कर दी थी।
        इसके बाद 2015 मे विशेष छपाई कर एक रुपए के कुछ नोट जारी किए गए थे।
        एक अधिकारी ने बताया कि 1994-95 मे एक रुपए के नोट की छपाई की कीमत 1.48 रुपए आती थी।
        2015 मे एक रुपए के नोट की प्रिंटिंग कॉस्ट 1.14 रुपए आई थी।
        अब जिस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है उससे एक रुपए के नोट की प्रिंटिंग कॉस्ट करीब 78.5 पैसे आएगी।
        इस तकनीक से दस रुपए के नोट की प्रिंटिंग कॉस्ट करीब 70 पैसे और 20 रुपए के नोट की प्रिंटिंग कॉस्ट 95 पैसे आ रही है।
        सूत्रो का कहना है कि लागत कम होने के बाद आरबीआइ एक रुपए के नोट फिर से जारी करने पर विचार कर रहा है।

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