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  • राहत:दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण आधा, बारिश से मदद की उम्मीद
    PUBLISHED : Nov 15 , 8:50 AM


  • दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण के आपात स्तर से बाहर आ गया है। बीते सात नवंबर के मुकाबले मंगलवार को हवा की गुणवत्ता में आधे से ज्यादा सुधार हुआ। मौसम विभाग के मुताबिक बुधवार को बारिश के कारण प्रदूषण से राहत और बढ़ेगी। सफर के अनुसार सात नवंबर को दिल्ली की हवा में पीएम 2.5 का स्तर 640 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर था। मंगलवार को घट कर 236 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक पहुंच गया। हालांकि यह समान्य स्तर (60 माइक्रोग्राम) से अभी भी कई गुना है।

    बारिश से मदद 
    मौसम वैज्ञानिक समरजीत चौधरी के अनुसार पाकिस्तान , पंजाब व राजस्थान के कुछ इलाकों में अच्छी बारिश हुई है। इसके चलते यहां फसलों के अवशेष जलाने से पैदा हुए धुएं में कमी आई है। वहीं हवा के रुख में बदलाव से भी प्रदूषण के स्तर में कमी आयी है। पहले उत्तर पश्चिमी हवाएं फसलों को जलाने से निकले धुएं को दिल्ली में ला कर एकत्र कर रहीं थी। वहीं अब हवाएं दक्षिण पूर्व से आ रही हैं। 

    दिल्ली सरकार ने NGT में फिर दायर की पुनर्विचार याचिका

    दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी में दमघोंटू प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ऑड-ईवन योजना पर लगायी गयी शर्तों पर पुनर्विचार का अनुरोध करते हुए राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के समक्ष मंगलवार को नयी याचिका दायर की। याचिका में न्यायाधिकरण से दोपहिया और महिला चालकों को ऑड-ईवन योजना के तहत एक वर्ष के लिए या 2000 बसों का इंतजाम होने तक छूट देने का अनुरोध किया गया है। नयी याचिका में एनजीटी से यह भी आग्रह किया गया है कि पड़ोसी राज्यों को उनके यहां ऑड-ईवन योजना लागू करने का निर्देश दिया जाये।
           
    इससे पहले दिल्ली सरकार ने पुनर्विचार याचिका वापस ले ली थी
    इससे पहले दिल्ली सरकार ने ऑड-ईवन योजना शर्तों के साथ लागू करने के एनजीटी के आदेश के खिलाफ सोमवार को दायर की गयी पुनर्विचार याचिका वापस ले ली थी। उस पर सुनवाई के दौरान न्यायाधिकरण ने दिल्ली सरकार को एक बार फिर फटकार लगाते हुए कई सवाल पूछे।
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    एनजीटी ने शनिवार को ऑड-ईवन योजना को अनुमति देते हुए दोपहिया वाहनों, महिलाओं और सरकारी कर्मचारियों को भी छूट नहीं देने का आदेश दिया था। सरकार 13 नवम्बर से पांच दिन के लिए ऑड-ईवन योजना लागू करना चाहती थी लेकिन न्यायाधिकरण द्वारा लगायी गयी शर्तों को देखते हुए उसने इसे फिलहाल टाल दिया था। दिल्ली सरकार का कहना था कि महिलाओं की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें छूट दी जानी चाहिए। न्यायाधिकरण ने पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए उससे सवाल किया कि वह योजना के दौरान महिलाओं के लिए अलग से बस क्यों नहीं चला सकती।

    न्यायाधिकरण ने दोपहिया वाहनों के संबंध में दिल्ली सरकार से पूछा कि जब अध्ययनों के अनुसार चार पहिया वाहनों की तुलना में दोपहिया वाहन अधिक प्रदूषण फैलाते हैं तो सरकार मनमाने ढंग से इन्हें छूट देने पर क्यों आमादा है। यह मजाक नहीं तो और क्या है? इससे क्या फायदा होने वाला है।
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    न्यायाधिकरण ने सुझाव दिया कि ऑड-ईवन योजना पर छूट के लिए वह उसके समक्ष दोबारा तभी आये जब उसके पास तार्किक तथ्य हों। उसने कहा कि बच्चों को संक्रमित फेफड़ों का उपहार न दें। स्कूल जाते समय बच्चों को मास्क पहनने पड़ते हैं।
           
    एनजीटी ने पूछा कि हालात बिगड़ने से पहले ही इससे निपटने के लिए उसके पास क्या उपाय हैं। सरकार को ऐसे कदम उठाने चाहिए कि पीएम-2.5 और पीएम-1० का स्तर जब 48 घंटे के दौरान खतरनाक स्तर से ऊपर निकल जाये तो इसे रोकने के उपाय स्वत: लागू हो जाएं।
            
    न्यायाधिकरण ने दिल्ली सरकार के छूट के अनुरोध पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा,' सरकार छूट मांगने की बजाय सकारात्मक कदम क्यों नहीं उठाती। पिछली बार सरकार ने कहा था कि वह चार हजार बसें खरीद रहीं है,
    इसका क्या हुआ?
            
    दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का मामला उच्चतम न्यायालय तक पहुंच चुका है। न्यायालय ने सोमवार को इस पर सुनवाई करते हुए केन्द्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब सरकार समेत दिल्ली के तीनों निगमों को नोटिस जारी कर प्रदूषण से निपटने के उपाय बताने को कहा।    

  • महिलाओं की तुलना में पुरुषों में मधुमेह की संभावना ज्यादा
    PUBLISHED : Nov 11 , 5:33 AM


  • देश की सबसे बड़ी डायग्नॉस्टिक चेन एसआरएल डायग्नॉस्टिक्स द्वारा किए गए एक विश्लेषण में सामने आया है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में मधुमेह होने की संभावना ज्यादा होती है.
    नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी डायग्नॉस्टिक चेन एसआरएल डायग्नॉस्टिक्स द्वारा किए गए एक विश्लेषण में सामने आया है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में मधुमेह होने की संभावना ज्यादा होती है. पिछले साढ़े तीन सालों में (2014 से 2017 के मध्य तक) 63 लाख से अधिक नमूनों के विश्लेषण में 21 फीसदी पुरुषों और 17.3 फीसदी महिलाओं में ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से अधिक पाया गया. देश के चारों जोन में 46-60 तथा 61-85 आयुवर्ग में मधुमेह के सबसे ज्यादा मामले (26.71 फीसदी और 27.01 फीसदी क्रमश:) पाए गए.

    शहरवार विश्लेषण की बात करें तो देश के अन्य शहरों की तुलना में मुंबई और कोलकाता में मधुमेह के सबसे ज्यादा मामले पाए गए (23.74 फीसदी और 22.07 फीसदी). आर एंड डी एंड मॉलीक्यूलर पैथोलोजी के सलाहकार व संरक्षक डॉ. बीआर दास ने कहा, 'अगर मधुमेह इसी दर से बढ़ता रहा, तो आने वाले समय में भारत चीन को पछाड़कर मधुमेह की दृष्टि से दुनिया की राजधानी बन जाएगा. यह स्थिति बेहद खतरनाक होगी, क्योंकि मधुमेह से पीड़ित आबादी उत्पादक आयु वर्ग की होगी, जिसका सीधा असर उनके परिवारों पर पड़ेगा.'

    यह भी पढ़ें : शराब पीने से कम होता है डायबिटीज का खतरा

    हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ तथा वल्र्ड इकोनोमिक फोरम द्वारा किए गए संयुक्त अध्ययनों के अनुसार, 2011 से 2030 के बीच मधुमेह के कारण दुनिया को सकल घरेलू उत्पाद में 1.7 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान झेलना पड़ेगा. इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार भारत में 6.9 करोड़ से ज्यादा लोग मधुमेह से पीड़ित हैं और हर साल इसके कारण तकरीबन 3.5 लाख मौतें होती हैं.'

    डॉ. दास ने कहा, 'जांच से लेकर उपचार तक, ज्यादातर लागत मरीज को खुद उठानी पड़ती है. स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत तथा मधुमेह से प्रभावित बढ़ती आबादी के चलते स्थिति बद से बदतर होती जा रही है और रोग के कारण मृत्युदर तेजी से बढ़ रही है. रोग के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाने की जरूरत है. रोग को नियंत्रित करने के लिए हमें उचित जीवनशैली एवं स्वास्थ्यप्रद आहार के सेवन की आदत डालनी होगी.'

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    चारों जोनों में किए गए विश्लेषण के अनुसार, भारत के पश्चिमी क्षेत्र में मधुमेह के मामले सबसे ज्यादा- 20.47 फीसदी है. देश भर में हमारी प्रयोगशालाओं में किए गए परीक्षणों में 19.22 फीसदी मामलों में मधुमेह पाया गया. मधुमेह के लिए काम में लिए जाने वाले परीक्षण हैं- फास्टिंग ब्लड शुगर, पोस्ट प्रेंडियल ब्लड शुगर और ग्लाकोसाइलेटेड हीमोग्लोबिन. किसी भी नमूने को मधुमेह के लिए पॉजिटिव बताने के लिए अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन 2017 के दिशा निर्देशों का पालन किया जाता है. तीन में दो परीक्षणों का आसामान्य होना एक व्यक्ति में मधुमेह को इंगित करता है.

  • जिला अस्पतालों को आदर्श बनायें
    PUBLISHED : Nov 04 , 12:54 PM

  • प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में देश में मप्र सबसे आगे
    डायलिसिस के साथ पैथालॉजी जाँच की नि:शुल्क सुविधा देने वाला देश का पहला राज्य
    मुख्यमंत्री श्री चौहान ने की स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभागों की समीक्षा

    मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है जहाँ सभी शासकीय जिला चिकित्सालयों में डायलिसिस के साथ साथ सभी पैथालॉजी जाँच की भी नि:शुल्क सुविधा उपलब्ध है। इसी प्रकार प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के द्वितीय एवं तृतीय त्रैमास में गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाएँ देने में देश में सबसे आगे है।

    यह जानकारी आज यहाँ मंत्रालय में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभागों की समीक्षा बैठक में दी गई। मुख्यमंत्री ने विस्तार से प्रमुख योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने सभी जिला अस्पतालों को आदर्श अस्पताल के रूप में स्थापित करने के लिये सभी संभव प्रयास करने के निर्देश दिये।

    बैठक में बताया गया कि सभी जिलों में उपलब्ध 41 हजार चिकित्सा उपकरणों के संचालन, प्रबंधन और रख-रखाव के लिये विशेष कदम उठाये गये हैं। उपकरणों के संचालन की शिकायतें दर्ज करवाने की व्यवस्था की गई ताकि उन्हें तत्काल सुधारा जा सके।

    नि:शुल्क कैंसर कीमोथैरेपी योजना के अंतर्गत उज्जैन जिला चिकित्सालय में पैलिएटिव केयर सेंटर शुरू किया जा रहा है। सीटी स्केन सुविधा के लिये 19 जिले तय किये गये हैं। इनमें 26 जनवरी 2018 तक सीटी स्केन सुविधा उपलब्ध करवा दी जायेगी।

    लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करने और गंभीर बीमारी का पता चलने पर उनके विशेषज्ञ इलाज करवाने के लिये शुरू की गई मुख्यमंत्री स्वास्थ्य शिविर योजना में 7 जनवरी से 11 फरवरी 2018 तक सभी जिलों में शिविर आयोजित किये जायेंगे। इस साल 15 जनवरी से 27 फरवरी 2017 तक आयोजित शिविरों में 50 हजार से ज्यादा लोगों का परीक्षण किया गया और गंभीर बीमारियों से पीड़ित रोगियों की नि:शुल्क सर्जरी कराई गयी। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में नौ लाख से ज्यादा गर्भवती महिलाओं का परीक्षण किया गया।

    महिला स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन फरवरी - मार्च 2018 में किया जायेगा। इस साल 20 लाख से ज्यादा महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। सघन मिशन इंद्रधनुष में शामिल 13 जिलों के 2 लाख 34 हजार बच्चों के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया है। बच्चों की सूची बनाने का काम चल रहा है। यह भी बताया गया कि समय पर रोकथाम करने के उपायों के चलते मौसमी बीमारियों का फैलाव कम रहा। मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों पर नियंत्रण रहा और इनका प्रकोप पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा है।

    मुख्यमंत्री ने चिकित्सा शिक्षा विभाग की भविष्य की कार्य-योजनाओं की समीक्षा करते हुए नये मेडिकल कॉलेजों का निर्माण कार्य समय पर पूरा करने और उनमें चिकित्सीय एवं पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और उपकरणों की व्यवस्था करने के निर्देश दिये। उन्होंने चिकित्सकों के लिये व्यावहारिक सेवा शर्तें बनाने के निर्देश दिये।

    बैठक में बताया गया कि दुर्गम क्षेत्रों में स्त्री रोग, निश्चेतना तथा शिशु रोग विशेषज्ञों की सेवाएँ देने के प्रयास किये जा रहे हैं। नये मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक फैकल्टी की भर्ती प्रक्रिया जल्दी ही शुरू की जायेगी। मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों को आकर्षित करने के लिये समयबद्ध पदोन्नति, चिकित्सा भत्ता, अर्द्धवार्षिकी आयु बढ़ाने जैसे उपायों पर भी विचार किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री के प्रमुख निर्देश -

        राज्य बीमारी सहायता निधि को और ज्यादा प्रभावी और सरल बनायें।

        मुख्यमंत्री बाल हृदय योजना और मुख्यमंत्री बाल श्रवण योजना में बच्चों के ऑपरेशन के बाद नियमित देखभाल सुनिश्चित करें।

        जिला अस्पतालों को आदर्श अस्पताल बनाने के लिये हर संभव कदम उठायें।

        जिला अस्पतालों में उपलब्ध मेडिकल उपकरणों के प्रबंधन और रख-रखाव के लिये पुख्ता व्यवस्था करें।

        मुख्यमंत्री स्वास्थ्य शिविर योजना से सामाजिक कार्यकर्ताओं, संस्थाओं को जोड़ें।

        गंभीर कुपोषित बच्चों के घरों में स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ दस्तक दें। उनके स्वास्थ्य पर निगरानी रखें।

        गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले महिला स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन पूरा करें।

        बच्चों के संपूर्ण टीकाकरण के सघन मिशन इंद्रधनुष के संचालन को प्रभावी बनायें। टीकाकरण का लक्ष्य हासिल करने के लिये निगरानी तंत्र को मजबूत करें।

        नये मेडिकल कॉलेजों के लिये चिकित्सकों की भर्ती की प्रक्रिया तत्काल शुरू करें।

    बैठक में मुख्य सचिव श्री बी.पी. सिंह, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री ए पी श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव स्वास्थ्य श्रीमती गौरी सिंह, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री श्री एस के मिश्रा, सचिव श्री विवेक अग्रवाल एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
    ए.एस.

  • मध्य प्रदेश में मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी नहीं आई ....
    PUBLISHED : Nov 01 , 9:09 AM

  • डॉ.नवीन जोशी
    भोपाल।महिलाओं और बच्चो के लिए मध्य प्रदेश में करोड़ो रूपये खर्च किये जा रहे है बावजूद इसके न मातृ मृत्यु दर में कमी आई है ना शिशु मृत्यु दर में।शिशु मृत्यु दर में जहां मध्य पहले स्थान पर हैं वहीं मातृ मृत्यु दर भी मध्य प्रदेश में ज्यादा है।यही वजह है कि अब प्रदेश सरकार प्रदेश के 16 सबसे ज्यादा मातृ शिशु मृत्यु दर वाले जिलों में संविदा पर डॉक्टरों की नियुक्ति करने जा रही है।लेकिन 5 महीने हो जाने के बावजूद कोई डॉक्टर जिलों में जाने को तैयार नहीं।

    मध्य प्रदेश सरकार और उसकर जन प्रतिनिधि भले ही मध्य प्रदेश में तरक्की का दावा ओर वादा करते हों,लेकिन जमीनी हक़ीक़त कुछ ओर ही कहते नजर आती है।जहां प्रदेश कुपोषण के मामले में नम्बर 1 है तो वहीं बलात्कार के मामले में भी पहले स्थान पर है और रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया की 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक शिशु मृत्यु दर में भी मध्य प्रदेश पहले स्थान पर है।लगातार 11 सालो से मध्य प्रदेश में यही हालत बने हुए है ।
    - प्रति हजार बच्चो पर शिशु मृत्यु दर 51 है ,इसमें बालिका शिशु मृत्यु दर 53 है तो बालक शिशु मृत्युदर 51 है। राष्ट्रीय मानक 27 है।
    -सबसे ज्यादा खराब हालत ग्रामीण अंचलों में है जहां प्रति हजार बच्चो में 57 बच्चो की मौत ।
    - शहरी छेत्रों में भी हालत बेहतर नही है यहाँ भी प्रति हजार बच्चो में 35 बच्चो की मौत जन्म के समय हो जाती है।
    - मातृ मृत्यु दर का औसत जहां एक लाख प्रसव पर 109 मानक है,वो प्रदेश में 221 है।
    - पिछले पांच साल में मध्य प्रदेश में 4826 प्रसूताओं की मौत हुई तो 96 हजार 159 शिशुओं ने जान गंवाई।
    यही वजह हैं सरकार अब प्रदेश के 16 जिलों में मातृ शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए संविदा पर डॉक्टरों की नियुक्ति करने जा रही है।इसके लिए सरकार 5 महीनो में दो बार डॉक्टरों के आवेदन मांग चुकी हैंलेकिन कोई जाने को तैयार नही है।सरकार मानती है कि मृत्यु दर को कम करने के लिये ठोस कदम उठा रही है।
    दरअसल सीधी छिंदवाड़ा मंडल रायसेन विदिशा बालाघाट बैतूल छतरपुर गुना झाबुआ नीमच सागर उमरिया सिंगरौली डिंडोरी जैसे जिलों में मातृ शिशु डर सबसे ज्यादा है यही वजह है कि सरकार इन छेत्रों में डॉक्टरों की विशेष नियुक्ति चाह रही है।लेकिन सरकार की नीतियों के चलते डॉक्टर्स इन जिलों में जाने को तैयार नही।

    प्रदेश में डॉक्टरों की कमी।

    - 1336 विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद लेकिन काम सिर्फ 289 कर रहें हैं।
    - सामान्य ड्यूटी चिकित्सा अधिकारी के 1854 पद लेकिन 904 कार्य कर रहे हैं।

    - रेडियोग्राफर के 160 ,लैब टेक्नीशियन के 226 ओर नर्सिंग के 1161 खाली है।

     आंकड़े साफ बताते है कि प्रदेश में डॉक्टरों की भारी कमी है लेकिन पर्याप्त मात्रा में डॉक्टर्स ने होने के चलते अधिकतर मौते होती है।वह करोड़ो खर्च हो जाने के बावजूद सरकार इन मौतों पर काबू पाने में सक्षम नहीं।

    प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग का बजट

    2011-12---- दो हजार 639 करोड़।

    2015-16--- चार हजार 643 करोड़।

    2016-17-- पांच हजार 643 करोड़।

    इनमें नेशनल हेल्थ मिशन का बजट शामिल नही है।

    जाहिर है इतने बजट के बावजूद मातृ शिशु मृत्यु होने की वजह विपक्ष सरकार की नाकामी मानता है।
    - जिस प्रदेश में लाडली लक्ष्मी और कन्यादान जैसे योजनाएं चलाकर मुख्यमंन्त्री शिवराज जगत मामा बन चुके हो।उस प्रदेश में अगर सरकारी लापरवाही से लाड़लियों ओर लाडलों की मौत होगीतो सरकार पर कलंक लगना लाजमी होगा।
    डॉ. नवीन जोशी

  • स्मार्टफोन के ज्यादा इस्तेमाल से किशोरों को हो सकती है नींद की समस्या: स्टडी
    PUBLISHED : Oct 24 , 7:59 AM


  • स्मार्टफोन और टैबलेट का अत्यधिक इस्तेमाल करने से बच्चों को अनिद्रा की शिकायत हो सकती है। एक स्टडी में इस बात का खुलासा हुआ है। स्टडी में बताया गया है कि दिन में  इन चीजों पर दो घंटे से अधिक समय बिताने से उन्हें नींद पूरी नहीं होने की समस्या हो सकती है।

    इस विषय से जुड़े ज्यादातर विशेषज्ञों के मुताबिक सात घंटे से कम की नींद अपयार्प्त मानी जाती है। अध्ययन करने वालों ने 3,60,000 से अधिक किशोरों के दो सर्वेक्षेणों के आंकड़ों पर गौर किया। उनमें सान डियेगो स्टेट यूनीवर्सिटी के शोधार्थी भी शामिल थे।

    स्लीप मेडिसिन  नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन मे यह भी पाया गया है कि जो किशोर ऑनलाइन जितना अधिक समय बिताते हैं, वे उतनी ही कम नींद ले पाते हैं। अच्छी जीवनशैली में क्वालिटी नींद भी शामिल है लेकिन अधिकतर लोग इससे समझौता कर लेते हैं।

  • Dhanteras 2017: इस समय खरीदें गाड़ी, जानिए कब ज्वेलरी खरीदना रहेगा शुभ
    PUBLISHED : Oct 17 , 8:57 AM


  • Dhanteras 2017 धनतेरस इस बार शुक्र और चंद्रमा के संयोग से खास है। शुक्र हालांकि अपनी नीच राशि में है, परन्तु शुक्र और चंद्रमा का योग ही समृद्धि के लिए शुभ है। शुक्र को धन, ऐश्वर्य और वैभव का ग्रह माना गया है। चंद्रमा तो शुभ में वृद्धि और तेज गति का कारक है। शुक्र लक्ष्मी जी का भी प्रतीक है। दोनों ग्रहों के शुभ संयोग से इस बार धनतेरस पर लक्ष्मीवर्षा होगी। धनतेरस पर जो भी निवेश करेंगे या खर्च करेंगे, लक्ष्मी जी का स्थायी वास होगा।

    कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस होती है। समुद्र मंथन का प्रसिद्ध प्रसंग इसी से जुड़ा है। भगवान धन्वंतरी एक हाथ में अमृत कलश और एक हाथ में आयुर्वेद का ग्रंथ लेकर प्रकट हुए थे। संदेश यही है कि स्वस्थ तन ही अमृत है। इस रात यम दीपक भी जलाया जाता है, जो घर-परिवार की मंगलकामना के लिए होता है।

    - लक्ष्मी जी का प्रथम वास धातु में माना गया है।
    - धातु (बर्तन, सोना-चांदी) खरीदना इसलिए शुभ है।   
    - इस दिन खरीद पर लक्ष्मी का स्थायी वास होता है
    - इस दिन किया गया निवेश भविष्य में लाभकारी होता है
    - धनतेरस पर भगवान धन्वंतरी (आयुर्वेद के देव) प्रकट हुए थे।
    - समुद्र मंथन में निकले 14 रत्नों में एक रत्न धन्वंतरी का भी है।
    - स्वास्थ्य, संतान, समृद्धि का ही प्रतीक पर्व धनतेरस है।

    गाड़ी, इलेक्ट्रिक गुड्स

    दोपहर 12:40 बजे से 2:25 बजे तकशाम 5:25 बजे से 7:03 बजे तक

    प्रॉपर्टी और आभूषण

    दोपहर 2:25 बजे से 3:56 बजे तकशाम 7:03 बजे से रात 9 बजे तक

    Dhanteras 2017:इस समय खरीदें गाड़ी,जानिए कब ज्वैलरी खरीदना रहेगा शुभ

    शुभ मुहूर्त:

    प्रात: 9:18 बजे से दोपहर 1:28 रात्रि के समय
    - 7:16 से 8:53 के मध्यधनतेरस पूजन
    -सायं 07:19 बजे से 08:17 बजे तकप्रदोष काल
    -सायं 05:45 से रात्रि 08:17 बजे तकवृषभ काल
    -सायं 07:19 बजे से रात्रि 09:14 तकत्रयोदशी तिथि प्रारंभ
    -मध्यरात्रि 00:26 से, 17 अक्तूबर 2017त्रयोदशी तिथि समाप्त   
    -सायं 00:08 बजे, 18 अक्तूबर 2017( विभोर इंदुसुत, पंडित उमेश शास्त्री, पंडित हरिदत्त शा के आधार पर)

  • वीवीपेट से होंगे प्रदेश के दो उपचुनाव
    PUBLISHED : Oct 10 , 7:55 AM


  • डॉ नवीन जोशी
    भोपाल।
    प्रदेश के सतना जिले में स्थित चित्रकूट और अशोकनगर जिले में स्थित मुंगवाली विधानसभा के उपचुनाव वीवीपेट यानि वोटर वेरियेबल पेपर आडिट ट्रेल से होंगे। भारत चुनाव आयोग ने इसके लिये निर्देश जारी कर दिये हैं। जल्द ही इन दोनों सीटों के उपचुनाव हेतु तिथियां घोषित होंगी।
    सतना एवं अशोकनगर जिलों में चुनाव आयोग की ईवीएम मशीनें पहले से ही मौजूद हैं तथा अब इनमें वीवीपेट लगाने के लिये संबंधित उपकरण भेजे जायेंगे। वीवीपेट से जहां मतदाता को स्क्रीन पर कुछ सेकण्ड के लिये दिख जायेगा कि उसने किसको मत दिया है वहीं मशीन से एक पर्ची निकलेगी जिसमें जिस उम्मीदवार को वोट दिया गया है उसका नाम, चुनाव चिन्ह तथा पर्ची का सीरियल नंबर होगा जो एके अलग बाक्स में मतदान केंद्र का पीठासीन अधिकारी रख देगा। ईवीएम मशीन से मतगणना के दौरान यदि उम्मीदवार कहता है कि उसे ईवीएम मशीन में दर्ज मतों पर भरोसा नहीं है तो फिर इन पर्चियों को गिना जायेगा तथा जिस उम्मीदवार को जो मत मिले हैं उन्हें लिखा जायेगा।
    ज्ञातव्य है कि वीवीपेट के उपयोग हेतु सुप्रीम कोर्ट ने 8 अक्टूबर 2013 को आदेश दिये थे तथा कहा था कि इसे धीरे-धीरे उपयोग में लाया जाये। चुनाव आयोग ने तब से कई चुनी हुई विधानसभा एवं लोकसभा सीटों पर इसका उपयोग किया। लेकिन अब चुनाव आयोग ने निर्णय लिया है कि आने वाले सभी विधानसभा एवं लोकसभा आम चुनावों तथा उपचुनावों में वीवीपेट का उपयोग किया जायेगा।
    उल्लेखनीय है कि नगरीय एवं पंचायत चुनाव कराने वाला राज्य निर्वाचन आयोग अपनी अलग ईवीएम मशीने रखता है तथा विधानसभा एवं लोकसभा चुनाव कराने वाले चुनाव आयोग की अलग ईवीएम मशीनें होती हैं तथा हर जिले के कलेक्टर के अधीन ये दोनों ईवीएम मशीनें संरक्षित होती हैं तथा दोनों आयोग हर चार माह में इनके संधारण की रिपोर्ट संबंधित जिला कलेक्टरों से लेते हैं।

    कांग्रेस के क्षत्रपों ने शुरु की तैयारी
    भोपाल।
    अगले एक-डेढ़ साल में विधानसभा एवं लोकसभा के आम चुनाव होने हैं तथा मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के क्षत्रपों ने मैदान में आकर अपने वर्चस्व को बनाने की तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। जहां ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भिण्ड जिले की अटेर विधानसभा सीट जीतवाकर अपने प्रभाव का प्रोजेक्शन किया है वहां कमलनाथ ने संगठन में अपनी पैठ बनाने के लिये प्रदेश प्रभारी मोहन प्रकाश की छुट्टी करवा कर अपना व्यक्ति बैठा दिया है। दिग्विजय सिंह नर्मदा यात्रा के बहाने अपना दबदबा कायम करने जा रहे हैं। आने वाले दोनों आम चुनावों में ये तीनों नेता अपने समर्थकों को ज्यादा से ज्यादा सीटें दिलवाने का प्रयास करेंगे।
    डॉ नवीन जोशी

  • खाने का तेल : दिल के लिए कितना अच्छा, कितना खराब
    PUBLISHED : Oct 03 , 12:30 PM

  • वह वर्ष 1996 था जब खाने के एक तेल का विज्ञापन बड़ा लोकप्रिय हुआ था. उस विज्ञापन में जलेबी का शौकीन एक बच्चा होता था. संदेश था कि बताए गए तेल में जलेबी तली जाए.
    नई दिल्ली: वह वर्ष 1996 था जब खाने के एक तेल का विज्ञापन बड़ा लोकप्रिय हुआ था. उस विज्ञापन में जलेबी का शौकीन एक बच्चा होता था. संदेश था कि बताए गए तेल में जलेबी तली जाए. लेकिन आज दो दशक बाद कोई भी तेल कंपनी तेल बेचते वक्त जिस चीज से जुड़ने से बचती है वह है तला हुआ खानपान और चाशनी में लिपटा हुआ व्यंजन. ऐसा इसलिए क्योंकि समय के साथ दिल भी बूढ़ा होता जाता है और उसका ध्यान रखना जरूरी है. यही वजह है कि आज कल खाने के सभी तेलों के साथ ‘‘ दिल के लिए अच्छा’’, ‘‘मोनोअनसेच्युरेटेड फैट ’’, ओमेगा थ्री, ‘‘कैरोटीन’’, ‘‘प्लांट स्टेरॉलस’’ जैसे शब्द उसके लेबल में जोड़ दिए जाते हैं, चाहे वह आपको समझ आएं या नहीं.

    गुरुग्राम की रहने वाली प्रिशा मानडव्या ने कहा, ‘‘ इन लेबलों के बारे में कुछ भी समझ नहीं आता.’’ इसके अलावा उनके मुताबिक हर तेल के बारे में कहा जाता है कि वह दिल के लिए अच्छा है, इससे भ्रम और बढ़ जाता है.

    चिकित्सकों की मानें तो तेल के बारे में चाहे कितने भी दावे किए जाएं लेकिन सभी में वसा होती है और सभी के अपने नुकसान हैं. भारत के शीर्ष हृदयरोग विशेषज्ञों में से एक डॉ. देवी शेट्टी अपने लेख ‘डाइट कम्स फर्स्ट इन मैटर्स ऑफ दी हार्ट’’ में कहते हैं कि जब बीज में से तेल निकालना ही प्रकृति के विरुद्ध है तो तेल दिल के लिए अच्छा कैसे हो सकता है.

    फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल में हृदयरोग कंसल्टेंट डॉ. अमित कुमार कहते हैं, ‘‘ तेलों में मोनो सेच्युरेटेड फैटी एसिड (मूफा) और पॉली सेच्युरेटेड फैटी एसिड (पूफा) अलग-अलग मात्रा में होता है. वर्तमान में हमें जो जानकारी है उसके मुताबिक मूफा दिल के लिए अच्छा है. इसलिए जिन तेलों में मूफा की मात्रा अधिक होती है वह तेल बेहतर होते हैं. इसीलिए जैतून, सरसों, सोयाबीन, राइस ब्रान तेल, कनोला (राई) तेल और मूंगफली का तेल दिल के लिए बेहतर है. ’’ चिकित्सक कहते हैं कि अलग-अलग तेल का भिन्न तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए.

    इम्पीरियल होटल के शेफ प्रेम के पोगुला ने कहा, ‘‘ तलने के लिए मूंगफली के तेल का इस्तेमाल करें. ’’ कोलेस्ट्रॉल की समस्या है तो प्लांट ऑइल का इस्तेमाल करना चाहिए क्योंकि उनमें कोलेस्ट्रॉल नहीं होता. पौधे से निकलने वाले तेल हैं बादाम तेल, एवेकाडो सीड ऑइल, अलसी का तेल और नारियल तेल.

  • BHU में लाठीचार्ज के बाद तनाव बरकरार, सीएम योगी ने पूरे घटनाक्रम पर मांगी रिपोर्ट
    PUBLISHED : Sep 24 , 3:05 PM


  • वाराणसी: बीएचयू में कल देर रात लाठीचार्ज के बाद से गरमाया माहौल अभी भी शांत नहीं हुआ है. लाठीचार्ज के विरोध में बीएचयू के छात्रों ने एक शांति मार्च निकालने की कोशिश की, जिसे पुलिसकर्मियों ने जबरन रोक दिया. इसके पहले बीएचयू में शनिवार देर रात पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राओं पर जमकर लाठीचार्ज किया, जिसमें कुछ स्टूडेंट्स घायल भी हुए हैं. बीएचयू में शनिवार रात जो हिंसा हुई, उसका एक नया वीडियो सामने आया है. ये वीडियो बीएचयू के महिला महाविद्यालय कैंपस का है. वीडियो में साफ दिखता है कि लड़कियों का हुजूम गेट के अंदर की तरफ है और बाहर पुलिस जमा है. लड़कियां इस तरफ से पुलिसवालों के खिलाफ नारे लगाती हैं और पुलिस गेट की तरफ बढ़ती है. एक लड़की को छोड़कर बाकी की सभी लड़कियां अंदर की ओर भागती हैं. इतने में एक पुलिसवाला इस लड़की को धक्का देता है, जिससे वो गिर जाती है और फिर दो और पुलिसवाले उसे लाठी से मारते हैं. इसके बाद जोरदार हंगामा होता है.

    बीएचयू में पढ़ने वाली लड़कियां कैंपस में हो रही छेड़छाड़ की वारदातों के खिलाफ दो दिनों से धरने पर बैठी थीं. इनकी मांग थी कि वाइस चांसलर वहां आकर आकर उनकी परेशानियां सुनें और उनका समाधान निकालें. शनिवार रात क़रीब 11 बजे प्रदर्शनकारी छात्र-छात्राएं वीसी के घर की ओर जाने लगे. वहां बीएचयू के गार्डों से उनकी झड़प हुई. इसके बाद पथराव हुआ.

  • विवि व कालेजों की कार्यरत एवं अध्यनरत महिलाओं की मांगी समस्यायें
    PUBLISHED : Sep 22 , 6:39 AM


  • सीएम दिल से बात कार्यक्रम में रखेंगे इन समस्याओं को

    डॉ नवीन जोशी
    भोपाल।
    राज्य के उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों तथा उच्च शिक्षा विभाग के संभागीय अतिरिक्त संचालकों से कहा है कि उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत समस्त महिला अधिकारी-कर्मचारियों एवं विश्वविद्यालय/महाविद्यालय में अध्ययनरत समस्त छात्राओं को दिनचर्या में विविध समस्याओं जैसे पारिवारिक, सामाजिक, अकादमिक, संस्थागत, कल्ज्याणकारी योजनाओं के परिपालन से संबंधित एवं आर्थिक कइिनईयों का सामना करना पड़ता है। इस संबंध में संस्था में कार्यरत महिला अधिकारी-कर्मचारियों एवं छात्राओं से विचार-विमर्श कर समस्याओं से संबंधित जानकारी ई-मेल एमपी डाट मायगाव डाट इन पर भेजी जाये। यह जानकारी मुख्यमंत्री के दिल से बात रेडियो कार्यक्रम के लिये महिलाओं एवं छात्राओं से संबंधित मामलों पर सुझाव प्रेषित करने के संबंध मेंं ली जा रही है।

    भ्रष्टाचार का प्रकरण दर्ज होने पर सीएमओ का तबादला
    भोपाल।
    राज्य शासन ने बालाघाट जिले की लांजी नगर परिषद के मुख्य नगरपालिका अधिकारी शिवलाल झारिया के विरुध्द लोकायुक्त संगठन जबलपुर द्वारा भ्रष्टाचार का प्रकरण पंजीबध्द किये जाने पर उनका तबादला कर उन्हें सहायक परियोजना अधिकारी जिला शहरी विकास अभिकरण नरसिंहपुर पदस्थ कर दिया।
    डॉ नवीन जोशी

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